Saturday, February 16, 2019

जागरूकता फैलाने का सबसे बेहतर माध्यम है रेडियोः श्री पुष्पेंद्र पाल सिंह।

जागरूकता फैलाने का सबसे बेहतर माध्यम है रेडियोः श्री पुष्पेंद्र पाल सिंह।
                रेडियो ने अभी तक लंबा और महत्वपूर्ण सफर तय किया है और वर्तमान समय में भी संचार माध्यम के रूप में रेडियो की प्रासंगिकता बनी हुई है। आज के दौर में भी रेडियो लोगों के बीच जागरूकता फैलाने का सबसे बेहतर माध्यम है। रेडियो एक ऐसा माध्यम है जिसकी भौगोलिक रूप से देश के 99 प्रतिशत हिस्से में पहुंच है और इसने देश के सामाजिक विकास और परिवर्तन में महत्वूपर्ण भूमिका निभाया है। ये बातें मध्य प्रदेश ‘माध्यम’ में ओएसडी श्री पुष्पेंद्र पाल सिंह ने पीआईबी, शोध पत्रिका ‘समागम’ एवं पब्लिक रिलेशंस सोसायटी, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में 16 फरवरी 2019 (शनिवार) को पीआईबी के सभागार में 'रेडियोः कल, आज और कल' विषय पर आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि रेडियो बहुत ही सस्ता, सुगम और सरल माध्यम है। श्री सिंह ने कहा कि समय के साथ रेडियो का दौर भी बदलता रहा और जब कभी भी यह लगा कि रेडियो अब तो बीते दिनों की बात हो जाएगी, तभी रेडियो एक नए अवतार में सामने आया और अपनी प्रासंगिकता साबित की। उन्होंने कहा कि कम्यूनिटी रेडियो एक लोकतांत्रिक रेडियो है और इसके जरिए लोग अपनी भाषा में अपनी बात अपने लोगों के बीच कह रहे हैं। कार्यक्रम में सबसे पहले पुलवामा हमले में शहीद हुए वीर जवानों को मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।

      शोध पत्रिका समागम के संपादक श्री मनोज कुमार ने कहा कि रेडियो का भविष्य उज्ज्वल है। उन्होंने कहा कि आज का दौर कम्यूनिटी रेडियो का दौर है और मध्य प्रदेश में मौजूदा दौर में 9 कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन काम कर रहे हैं और जनता के बीच विकासपरक पत्रकारिता को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने इस बात जोर दिया कि रेडियो प्रसारण में भाषा की सौम्यता बनी रहनी चाहिए।

बिग एम की रेडियो जॉकी अनादि ने कहा कि आज के एफएम रेडियो पर मार्केट का दबाव काफी अधिक है। सच कहें तो आज के एफएम के दौर में 20 फीसदी रेडियो है और 80 फीसदी मार्केट है। पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि युवाओं में एफएम चैनल्स काफी लोकप्रिय हैं। उन्होंने कहा कि आज के रेडियो कार्यक्रमों में फन का एलिमेंट ज्यादा है।

भारतीय सूचना सेवा के पूर्व अधिकारी श्री विनोद नागर ने आकाशवाणी समाचार में बिताए अपने दिनों को याद किया और कहा कि रेडियो राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रेडियो ने लोगों को सूचना देने, शिक्षित करने और मनोरंजन करने में काफी महत्वूर्ण भूमिका अदा की है। उन्होंने रेडियो के बारे में कई रोचक तथ्य भी लोगों के साथ शेयर किए।

पीआईबी, भोपाल के उप निदेशक श्री अखिल कुमार नामदेव ने कहा कि रेडियो की पहुंच अन्य संचार माध्यमों की तुलना में ज्यादा है। यही वजह है कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपनी ‘मन की बात’ कहने के लिए रेडियो (आकाशवाणी) को ही माध्यम के रूप में चुना। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रोताओं ने हिस्सेदारी की और अपने प्रश्नों के द्वारा अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया।

डॉ प्रकाश हिंदुस्तानी की क़लम।

इस्लामाबाद की छाती पर लिखें हमारी सेना का पराक्रम

प्रधानमंत्री जी। जी हां, बिना किसी सम्मानसूचक शब्द और अभिवादन के ही आपको यह पत्र लिख रहा हूं।  क्योंकि बीते करीब चौबीस घंटे से खयाल में यदि कोई सम्मानसूचक शब्द चल रहा है, तो वह केवल ‘शहीद’ है। इसी अवधि से अभिवादन के रूप में ‘हत्यारा पाकिस्तान’ ही कुलबुला रहा है। पुलवामा में कल जो कुछ हुआ, वह सिर्फ हमारे जवानों की नृशंस हत्या ही नहीं, बल्कि  पाकिस्तान का आपसे सीधा-सा सवाल है, कि ‘क्या बिगाड़ लोगे?’
प्रधानमंत्री जी, सर्जिकल स्ट्राइक पर यकीन  रखने वाला देश यह विश्वास भी रख रहा है कि आप फिर ऐसा कोई कदम उठाएंगे। लेकिन इस बार केवल ऐसा करने से काम नहीं चलेगा। सोलहवीं लोकसभा के सत्रों का अवसान हो चुका है। संसद के अगले सत्र में प्रधानमंत्री के तौर पर कौन नजर आएगा, कोई नहीं जानता। यह भी नहीं पता कि अगले स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश किसका संबोधन सुनेगा। फिर भी फिलहाल तो आप हैं। तो कुछ ऐसा कीजिए कि संसद में अगला प्रधानमंत्री 14 फरवरी, 2019 के बाद की देश की सबसे बड़ी उपलब्धि गिनाए। पाकिस्तान के पालतू चार सौ से अधिक आतंकियों के धड़ से अलग किए गए सिर के फोटोग्राफ्स के साथ। वह प्रधानमंत्री आप हों या कोई और, लेकिन तब तक कुछ ऐसा हो सके कि यह देश आपके पराक्रम के चलते पाकिस्तान की तबाही का साक्षी बन जाए। चीन सहित सारी दुनिया यह देख सके कि भारत की भूमि पर नापाक कदम उठाने वालों को किस तरह समूल नष्ट किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री जी, आपने तो इजरायल से मित्रता की है। उस दोस्त से सीखिए कि किस तरह देश की ओर खराब नजर उठाने वालों को उनके घर में घुसकर मारा जाता है। डोनाल्ड ट्रम्प आपके मुरीद हैं, तो उनके पूर्ववर्ती जॉर्ज बुश जूनियर से सीखिए कि कैसे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले की कीमत तालिबानियों के सामूहिक नरसंहार के रूप में वसूली जाती है। बराक ओबामा से सबक लीजिए कि किस तरह ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकियों को कुत्ते की मौत मारा जाता है। यह देश  सब-कुछ भूलने को तैयार है। वह नोटबंदी की कतार में लगे लोगों की मौत को बिसरा देगा। जीएसटी के नाम पर व्यापारियों द्वारा की जा  रही लूट-खसोट के दर्द को अपनी नीयति मानकर चुप हो जाएगा। हरेक खातें में पंद्रह-पंद्रह लाख न आने के मलाल को भुला देगा। लेकिन उसके कानों से उस धमाके की गूंज शांत नहीं हो पाएगी जो कल पुलवामा में हुआ। इस धमाके की भरपाई केवल वह चीखें कर सकती हैं, जो कल हुए हमले के षड़यंत्रकारियों और उन के समर्थकों का गला काटे जाने पर सुनाई देंगी।
कल का हमला बेहद असामान्य इसलिए भी है कि इसमें सीरिया और अफगानिस्तान जैसी आतंकी वारदातों की झलक मिलती है। इसका अर्थ समझिए। वह यह है कि इस देश में आतंकवाद और गंभीर रूप लेता जा रहा है। कश्मीर में आए दिन इस्लामिक स्टेट के समर्थन में झंडे फहराये जाते हैं। उन घटनाओं पर सख्ती से काबू न पाने का नतीजा है कि आज हालात यहां तक पहुंच चुके हैं। उन्हें और बिगड़ने से रोकिए। र्इंट का जवाब पत्थर नहीं बल्कि गोला-बारूद से दीजिए। लिख दीजिए इस्लामाबाद की छाती पर आतंकवादियों के खून से हमारी महान सेना की पराक्रम गाथा। भौंकने दीजिए छद्म मानवाधिकार संगठनों और बिकाऊ मीडिया को। दुम हिलाते रहने दीजिए अलगाववादियों और उनके नाम का पट्टा बांधकर कश्मीर में सेना पर पथराव करते गद्दारों को। यह आशा अतिरंजित लग सकती है, लेकिन यकीन मानिए, कल के घटनाक्रम से कराह रहे देश के जख्मों पर अब इसी तरह से मरहम लगाया जा सकता है।

Thursday, February 14, 2019

देशहित और अण्डे वाली मुर्गी।

मुर्गी अंडे दे रही थी और मालिक बेंच रहा था।
मुर्गी देशहित में अंडे दे रही थी।
उसके मालिक ने कहा था-
’’ आज राष्ट्र को तुम्हारे अंडों की जरूरत है।
यदि तुम चाहती हो कि तुम्हारा घर सोने का बन जाये तो जम के अंडे दिया करो। आज तक तुमसे अंडे तो लिये गये लेकिन तुम्हारा घर किसी ने सोने का नही बनवाया। हम करेंगे। तुम्हारा विकास करके छोड़ेंगे।’’

मुर्गी खुशी से नाचने लगी।
उसने सोचा देश को मेरी भी जरूरत पड़ती है।
वाह मैं एक क्या कल से दो अंडे दूंगी।
देश है तो मैं हूं।
वह दो अंडे देने लगी।

मालिक खुश था।
अंडे बेचकर खूब पैसे कमा रहा था।
मालिक निहायत लालची सेठ था।
उसने मुर्गी की खुराक कम कर दी।
मुर्गी चौंकी। -’’ आज मुझे पर्याप्त खुराक नहीं दी गई। कोई समस्या है क्या ?’’
-’’ देश आज संकट में है। किसी भी मुर्गी को पूरा अन्न खाने का हक नहीं। जब तक एक भी मुर्गी भूखी है मैं खुद पूरा आहार नहीं लूंगी। हम देश के लिए संकट सहेंगे।’’
मुर्गी आधा पेट खाकर अंडे देने लगी। मालिक अंडे बेचकर अपना घर भर रहा था।
बरसात में मुर्गी का घर नहीं बन पाया।
मुर्गी बोली- आप मेरे सारे अंडे ले रहे हैं। मुझे आधा पेट खाने को दे रहे है। कहा था कि घर सोने का बनेगा। नहीं बना। मेरे घर की मरम्मत तो करवा दो।
मालिक भावुक हो गया।
बोला "तुमने कभी सोचा है इस देश में कितनी मुर्गियां हैं जिनके सर पर छत नहीं हैं। रात-रात भर रोती रहती हैं। तुम्हें अपनी पड़ी है। तुम्हें देश के बारे में सोचना चाहिए। अपने लिए सोचना तो स्वार्थ है।’’

मुर्गी चुप हो गई। देशहित में मौन रहने में ही उसने भलाई  समझी।

अब वह अंडे नहीं दे पा रही थी।
कमजोर हो गई थी।
न खाने का ठिकाना न रहने का।
वह बोलना चाहती थी लेकिन भयभीत थी।
वह पूछना चाहती थी-
"इतने पैसे जो जमा कर रहे हो-  वह क्यों और किसके लिए?
देशहित में कितना लगाया है?" लेकिन पूछ नहीं पाई।

एक दिन मालिक आया और बोला- ’’ मेरी प्यारी मुर्गी तुझे देशहित में मरना पड़ेगा। देश तुमसे बलिदान मांग रहा है। तुम्हारी मौत हजारों मुर्गियों को जीवन देगा।’’ 
मुर्गी बोली "लेकिन मालिक मैने तो देश के लिय बहुत कुछ किया है।"
मालिक ने कहा अब तुम्हे शहीद होने पड़ेगा।
बेचारी मुर्गी को अब सब कुछ समझ आ गया था
लेकिन अब वक्त जा चुका था और मुर्गी कमज़ोर हो चुकी थी, मालिक ने मुर्गी को बेच दिया।

मुर्गी किसी बड़े भूखे सेठ के पेट का भोजन बन चुकी थी।

मुर्गी देशहित में शहीद हो गई।🐔🙊🙈
नोट- जो आप सोच रहे हैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।
ये सिर्फ एक मुर्गी की कहानी है।
युवा बेरोजगारों, किसानों, मध्यवर्गीय नागरिकों, मजदूरों, गरीबों, कर्मचारियों को और अधिक उन्मादी होकर राष्ट्रभक्ति में बिना चू चप्पड़ किये देशी नेताओं और  कॉरपोरेट्स की तिजोरी भरना महान राष्ट्रभक्ति और युगधर्म की कसौटी है। इसपर चलते रहें।

जब पेंशन के रूप में अपना अधिकार मांगेंगे तो कहेंगे कि देश पर बोझ पड़ेगा और जब अपने वेतन भत्ते बढ़ाने होंगे तो हाथ उठाकर बिना बहस किये बढा लेंगे,हमे एक भी पेंशन नही देंगे और स्वयं तीन तीन पेंशन लेंगे।

Wednesday, February 13, 2019

रोज़ दो बॉईल अण्डे खाईये। स्वस्थ रहियेगा।

रोज दो उबले अंडे खाने से जो होगा आपने कभी सोचा नहीं होगा, एक बार जरुर पढ़े।

अंडा खाना हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है। अंडा खाने से शरीर मजबूत और ताकतवर बनता है। और शरीर का वजन तेजी से बढ़ता है। इसलिए दुबले-पतले और कमजोर लोगों को डॉक्टर भी अंडे खाने की सलाह देते हैं। कुछ लोग कच्चा अंडा खाते हैं। कुछ लोग अंडे को उबालकर खाते हैं। और कुछ लोग अंडे की आमलेट बना कर खाते हैं।

अंडे को उबालकर खाना शरीर के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। अंडे को उबालकर खाने से शरीर को प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व मिलते हैं। अंडे का सेवन सीमित मात्रा में करना ही शरीर के लिए फायदेमंद होता है। ज्यादा अंडे खाने से आपको कई तरह की समस्याएं भी हो सकती हैं। आज की पोस्ट में हम आपको रोजाना दो उबले अंडे खाने के रोचक फायदे बताएंगे। आइए जानते हैं। रोज दो उबले अंडे खाने से जो होगा आपने कभी सोचा नहीं होगा, एक बार जरूर पढ़ें।

मांसपेशियों में बदलाव। रोज दो उबले अंडे खाने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं। मांसपेशियों का आकार बढ़ता है। और शरीर की कमजोरी और दुबलेपन की समस्या खत्म होती है।

मस्तिष्क में बदलाव। रोज दो उबले अंडे खाने से मस्तिष्क स्वस्थ रहता है। मस्तिष्क का विकास तेजी से होता है। और भूलने की बीमारी खत्म होती है। क्योंकि अंडे में पाया जाने वाला कोलिन नामक तत्व मस्तिष्क की यादाश्त को तेज करता है। और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

हड्डियों में बदलाव। रोज दो उबले अंडे खाने से हड्डियां मजबूत होती हैं। अंडे में पाया जाने वाला विटामिन डी हड्डियों को मजबूत करता है। और शरीर के विकास में सहायक होता है।

कमजोरी। रोज दो उबले अंडे आने से शरीर की हर प्रकार की कमजोरी खत्म होती है। और शरीर का वजन तेजी से बढ़ता है।

Monday, January 14, 2019

प्रयागराज में कुंभ शुरू, करोड़ों लोग जुटे

प्रयागराज में विश्व महाकुम्भ।

प्रयागराज में कुंभ शुरू, करोड़ों लोग जुटे


प्रयागराज। आज मकर संक्रांति है। प्रयागराज (इलाहाबाद) में आज से कुंभ मेले का आरंभ हो रहा है। विश्व के सबसे बड़े मेले में करोड़ों लोग प्रयाग की धरती पर पवित्र गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम पर जुट रहे हैं। मेले को भव्य कुंभ-दिव्य कुंभ नाम दिया गया है। लगभग ढाई महीने तक चलने वाले इस आयोजन की भव्यता का अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि केंद्र और प्रदेश की सरकारों ने दुनिया भर में इसके प्रचार-प्रसार में करोड़ों रुपये खर्च किये हैं। साधु-संतों, औघड़ों, नागाओं, बाबाओं के अलावा कल्पवास करने के लिए लाखों लोग जुटे हुए हैं। इनको देखने के लिए लाखों विदेशी मेहमान भी आये हुए हैं। विदेशियों के लिए खास तौर पर पांच सितारा होटल जैसा टेंटसिटी बनाया गया है। अकबर के किले के ठीक सामने संगमतट पर करीब दस किलोमीटर के क्षेत्र में बसे कुंभनगर को कई सेक्टरों में बांटा गया है। यहां सभी तरह की सुविधाएं मौजूद हैं। अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित अस्पताल और उनके उपकेंद्र पूरे मेला क्षेत्र में हैं। इसमें चौबीस घंटे डॉक्टरों की मौजूदगी है। 


प्रयागराज शहर में पिछले दो वर्ष से इसकी तैयारियां चल रही हैं। शहर की सड़कें चार और छह लेन की बनाई गई हैं। सभी सड़कें आधुनिक और उच्च तकनीकी के प्रयोग से काफी चिकनी और मजबूत बनायी गयी हैं। रेलवे और हवाई अड्डे पर चौबीसों घंटे ट्रेनें और उड़ानों की व्यवस्था हसि।पूरे शहर में 'पेंट माई सिटी' के तहत पौराणिक विषयों पर आकर्षक और रंगीन चित्रकारी की गई है। इससे पूरा शहर सुंदर और अलग नजारा पेश कर रहा है।शहर में चौबीस घंटे बिजली-पानी की आपूर्ति हो रही है। मेले में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत कई केंद्रीय मंत्रियों, विभिन्न प्रदेशों के राज्यपालों-मुख्यमंत्रियों को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। 


हिन्‍दू धर्म में महीने दो पक्षों में विभाजित होते हैं - एक कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्‍ल पक्ष। ऐसे ही वर्ष को भी दो अयनों में बांटा गया है- एक उत्‍तरायन (या उत्तरायण) और दूसरा दक्षिणायन (या दक्षिणायण)। सूर्य जब धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेशकरता है, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है और सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है इसीलिए इसे मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इस त्‍योहार को पूरे देश में मनाया जाता है, वैसे तो यह पर्व जनवरी माह की 14 तारीख को मनाया जाता है, लेकिन कभी-कभी यह 15 जनवरी को भी पड़ जाता है। मकर संक्रांति के दिन से सूर्य की उत्‍तरायण गति प्रारंभ हो जाती है इसलिए मकर संक्रांति को उत्‍तरायण भी कहते हैं।


हिन्‍दु धर्म की मान्‍यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्‍णु ने असुरों का अंत कर उनके सिरों को मंदार पर्वत में दबाकर युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी। इसलिए इस मकर संक्रांति के दिन को बुराइयों और नकारात्‍मकता को समाप्‍त करने का दिन भी मानते हैं। इस दिन बहुत जगह पतंग उड़ाने की भी प्रथा है।


Thursday, January 10, 2019

व्हाट्सएप ने डिलीट किये डेढ़ मिलियन अकॉउंट।


नई दिल्ली। इन दिनों वॉट्सऐप अपने फीचर्स की वजह से नहीं, बल्कि चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को लेकर सुर्खियों में है. पिछले कुछ समय से लगातार रिपोर्ट्स आ रही हैं कि वॉट्सऐप पर भारत सहित कई देशों चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के लिए ग्रुप्स बनाए जा रहे हैं. इन ग्रुप्स में घड़ल्ले से ऐसे कॉन्टेंट शेयर भी किए जा रहे हैं। अब वॉट्सऐप ने कदम उठाया है और 1 लाख 30 हजार से ज्यादा अकाउंट्स ब्लॉक और डिलीट किए गए हैं. हाल के 10 दिनों में कंपनी ने इन अकाउंट्स को वॉट्सऐप से हटाना शुरू किया है. कंपनी ने हाल पिछले साल ही कहा था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेकर ऐसे अकाउंट्स छांटे जाते  हैं. वॉट्सऐप ने ये अकाउंट्स AI टूल्स के जरिए ढूंढा और फिर इन्हें अवैध ऐक्टिविटी की वजह से डिलीट किया गया। गौरतलब है कि वॉट्सऐप के चैट्स एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड होते हैं. इस सिक्योरिटी का मतलब ये है कि वॉट्सऐप पर भेजे गए मैसेज या कॉन्टेंट सिर्फ सेंडर और रिसीवर ही देख या पढ़ सकता है. इतना ही नहीं कंपनी भी इन्हें नहीं पढ़ सकती है. इसलिए ही वॉट्सऐप अवैध कॉन्टेंट के लिए AI का सहारा ले रही है. ये टूल वॉट्सऐप अकाउंट के अन-एनक्रिप्टेड जानकारियों की जांच करता है. इनमें प्रोफाइल फोटो, ग्रुप प्रोफाइल फोटोज और ग्रुप इनफॉर्मेशन शामिल हैं. जांज करके इन्हें हटाया जाता है। वॉट्सऐप PhotoDNA नाम का भी टूल यूज करता है जिसे फेसबुक यूज करता है. इसके तहत पॉर्न और अब्यूजिव इमेज की पहचान की जाती है और संभावित वॉट्सऐप ग्रुप या यूजर्स जो इसे शेयर कर सकते हैं उन्हें बैन किया जाता है। वॉट्सऐप के प्रवक्ता ने चाइल्ड पॉर्नोग्रफी की रिपोर्ट के बाद दिए एक बयान में कहा है, ‘WhatsApp चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज को लेकर जीरो टॉलरेंस पॉलिसी रखता है. हमने अपनी सबसे एडवांस्ड टेक्नॉलजी को इससे निपटने के लिए लगाया है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल है. ये प्रोफाइल फोटोज को स्कैन करता है और संदेह होने पर अकाउंट्स बैन करता है. हमें भारत और दूसरे देशों की जांच एंजेसियों को भी जवाब दिया है. चूंकि ऐप स्टोर्स और कम्यूनिकेशन सर्विस को अब्यूजिव कॉन्टेंट फैलाने के लिए यूज किया जा रहा है, इसलिए  इससे निपटने के लिए टेक कंपनियों को मिल कर काम करना होगा। हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा गया था कि थर्ड पार्टी ऐप्स के जरिए वॉट्सऐप ग्रुप के नाम को सर्च किया जा रहा है. वॉट्सऐप ने इसके रिप्लाई में कहा है कि वॉट्सऐप ऐसा कोई फीचर नहीं देता है जिससे किसी थर्ड पार्टी ऐप से ग्रुप के बारे में सर्च किया जा सके। वॉट्सऐप का टूल आपके अकाउंट को भी डिलीट कर सकता है अगर आप ऐसे किसी अवैध ग्रुप के साथ जुड़ते हैं. चूंकि अभी कोई भी बिना इजाजत आपको अपने ग्रुप में ऐड कर सकता है, इसलिए आप सावधान रहें और ऐसे अकाउंट्स या ग्रुप्स को रिपोर्ट करें जो चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के कॉन्टेंट शेयर करते हैं. 

पूरे हौसले से सारी कठिनाइयों से लड़ेंगे हम: कमलनाथ

इस लड़ाई में हम कामयाब होंगे

कठोर डगर की विरासत पर

सधे हुए कदमों से बढ़ेंगे हम ,

पूरे हौसले से सारी कठिनाइयों से लड़ेंगे हम ,

सुशासन की एक-एक सीढ़ियाँ गढ़ेंगे,

और कदम-दर-कदम

उस पर चढ़ेंगे हम –

चढ़ेंगे हम –

राज्यपाल महोदया ने ‘हम सबकी सरकार कैसे प्रदेश का भविष्य सँवारेगी’ इस पर प्रकाश डाला है। मैं ये मानता हूँ कि हमारे सामने आर्थिक संदर्भों में कई चुनौतियाँ हैं, मगर चुनौतियों को अवसर में बदलने का नाम ही मध्यप्रदेश है। हम इस कठोर डगर पर सधे हुए कदमों से चलेंगे।

हम जानते हैं कि बीते 15 वर्ष के इतिहास की गलतियों से सबक नहीं लेंगे तो भविष्य हमें माफ़ नहीं करेगा। हमारी मान्यता है कि किये हुए काम अपना प्रचार ख़ुद करते हैं, इसलिए हम सिर्फ़ कोरी घोषणाओं से बचें और अपना सारा ध्यान काम पर लगाएँ।

मध्यप्रदेश के नागरिकों ने नई सरकार को बदलाव के लिये चुना है। ये बदलाव सुशासन के लिये है। बीते 24 दिनों में बदलाव की पदचाप सुनाई देने लगी है। हम सरकार में से ‘मैं और मेरी’ हटाकर ‘हमारी सरकार’ की भावना स्थापित करना चाहते हैं। अब हर नागरिक गर्व से कह सकता है, ‘मैं भी सरकार हूँ’। हम सही मायने में सत्ता की कमान प्रदेश के नागरिकों को सौंपना चाहते हैं ।

विश्वास मानिए, जब भी सत्ता ‘व्यक्ति केंद्रित’ होती है, तो प्रजातंत्र को नुकसान पहुँचता है। इसमें सामूहिकता का बोध होना चाहिए। पक्ष, प्रतिपक्ष और जनता, सबका दायित्व प्रजातंत्र ने निर्धारित किया है। हमारी मान्यता है कि सरकार ठीक काम करे, इसके लिये प्रतिपक्ष मज़बूत और ज़िम्मेदार होना चाहिये।

मैं ये साफ़ कर देना चाहता हूँ कि हमारी लड़ाई प्रतिपक्ष के खिलाफ़ नहीं है। हम सब मिलकर मध्यप्रदेश की आर्थिक बदहाली, कुपोषण, अपराध, घटते रोज़गार के अवसर और कम होते औद्योगिक निवेश के खिलाफ़ लड़ाई लड़ेंगे और कामयाब होंगे। हमारी प्राथमिकता में नागरिकों का स्वास्थ्य, शिक्षा और अधोसरंचना भी है।

हमारे अन्नदाता भाइयों को कठिनाइयों से उबारना है। कर्ज माफ़ी स्थाई समाधान नहीं है। उनकी बहुत बड़ी अपेक्षाएँ नहीं हैं। वो सिर्फ़ अपनी फ़सलों के दाम चाहते हैं,ये हमें सुनिश्चित करना होगा।

भारतीय सनातन संस्कृति से बेटियाँ देवियों का स्वरूप हैं। उनसे प्रेरणा ली गई है। आज क्या हम उन्हें प्रताड़ित होने दें ? कतई नहीं। उनके सशक्तिकरण के लिए कदम उठा रहे हैं। उनके ससुराल जाने के वक्त 51 हज़ार रु. देकर पिता का फ़र्ज निभा रहे हैं। बेटियाँ खुशी मनाती हैं, तो तरक्की मुस्कुराती है।

प्रदेश का उज्जवल भविष्य युवाओं में निहित है। अगर उनको अवसर प्रदान किये जाएंगे, तो हम तरक्की की पायदान चढ़ते जाएंगे। ये तब ही संभव है जब मध्यप्रदेश में निवेश हो और वो सिर्फ़ बड़े आयोजनों से आकर्षित नहीं होगा। बड़े कदम उठाने की ज़रूरत है। लाल फीता शाही ख़त्म कर लाल कारपेट बिछाने होंगे।

गौ माता के लिए गौ शाला हो, भगवान राम का वनगमन पथ या नर्मदा जैसी शास्त्रीय नदियों की अविरलता हो, हम अपने वचन-पत्र के प्रति पूरी प्रतिबद्धता से काम करेंगे।

हम गर्व से कह सकते हैं कि मध्यप्रदेश देश का वो राज्य है जहाँ सबसे ज़्यादा आदिवासी भाई रहते हैं और प्रदेश के विकास में भरपूर साथ देते हैं। अब बारी हमारी है उनका साथ निभाने की, उनकी खुशियाँ उन्हें लौटाने की। अनुसूचित जाति, सामान्य वर्ग, हर वर्ग के हाथों में लेकर हाथ चलेंगे। हम सब साथ साथ करेंगे ‘सिर्फ़ और सिर्फ़ सुशासन के लिए बदलाव की बात।’

मैं जब से चला हूँ, मेरी मंज़िल पर निगाह है। आज तक मैंने मील का पत्थर नहीं देखा।